*कन्या भोज *
बात अभी की नहीं है कुछ समय पुरानी है आज याद आई है तो आपके साथ शेयर कर रहा हूं रोज शाम को घूमने की आदत सी हो गई थी कटनी में रहता था तब ऑफिस से आकर बच्चे और पत्नी के साथ शाम को घूमने जाना आम बात थी उस टाइम भी कुछ ऐसा ही हुआ पानीपुरी की आदत बहुत गंदी होती है रोज शाम पानी पुरी खाना सबको पसंद है पानीपुरी वाला हमेशा की तरह हमको को देख पानीपुरी की प्लेट आगे कर देता वहां आसपास बहुत भिकारी घूमते रहते थे जहां पर भी खाना दिखता मांगने लगते थे कोई भी भिकारी मांगता तो माफ करो कहने की आदत सी पड़ गई है बिना देखे ही आगे जाओ बोल देता हूं वैसे ही उस दिन भी वह एक छोटी 9 साल की लड़की हाथ फैला कर कुछ मांगने आई आदत के मुताबिक कुछ भी देखे बिना माफ कर दो कह दिया और दुकान वाले ने भी चिल्ला कर उसे भगा दिया पेट भर पानी पूरी खाने के बाद जैसे ही गाड़ी पर बैठा मेरी निगाह लड़की पर पड़ी डस्टबिन से कुछ खाने की चीज निकाल कर खा रही थी उसे सच में भूख लग रही थी उसके खाने की तलब अलग ही बता रही थी कि बहुत समय से भूखी थी उसे खाना चाहिए था उसे देख याद आया कि मां ने कहा था कि कन्या भोज के लिए अपने मोहल्ले में कुछ कन्याओं को खाने पर बुला लेना मैंने वही किया उस बच्ची को बुलाया पाव भाजी खाने के लिए कहा उसने प्यार से मुझसे पूछा मेरी छोटी सी बहन को भी लेआऊं मैंने कहा ले आओ छोटी 4 साल की बच्ची दौड़ लगाकर आई दोनों बहनों ने पाव भाजी पेट भर के खाइ पानी पिया और एक प्यारी सी मुस्कान धन्यवाद के साथ दी और दोनों खेलते हुए चली गई मैंने कन्या भोज की शुरुआत तो कर दी थी बस कुछ घरों में और निमंत्रण देना बाकी था
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